केंद्रीय बजट 2026–27 में क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) के लिए ₹2,200 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत कम है। दिल्ली–मेरठ कॉरिडोर का निर्माण कार्य लगभग अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है, जबकि दिल्ली–अलवर और दिल्ली–करनाल जैसे अन्य प्रस्तावित कॉरिडोर अभी तक औपचारिक मंजूरी की प्रतीक्षा में हैं। एनसीआरटीसी के अधिकारियों के अनुसार मौजूदा बजटीय आवंटन फिलहाल पर्याप्त माना जा रहा है, क्योंकि चालू कॉरिडोर पर अधिकतर निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और नए प्रोजेक्ट्स पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है। इस पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में यातायात की भीड़ को कम करना और वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
बजट 2026 में दिल्ली मेरठ RRTS को मिले 2200 करोड़ रूपये – Delhi Meerut RRTS Get 2200 Crore Rupees in Union Budget 2026
रीजनल रेल ट्रांजिट सिस्टम (RRTS), जिसे दिल्ली सहित पूरे NCR में पब्लिक ट्रांसपोर्ट में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली परियोजना माना जा रहा है, को इस वर्ष के केंद्रीय बजट में पिछले साल की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत कम आवंटन मिला है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली–मेरठ कॉरिडोर जून 2025 की निर्धारित समयसीमा तक पूरी तरह चालू नहीं हो सका है, जबकि दिल्ली–अलवर और दिल्ली–करनाल कॉरिडोर अभी भी केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए केंद्रीय बजट में देश के पहले रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) हेतु कुल ₹2,200 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें से ₹1,324 करोड़ राजस्व व्यय और ₹876 करोड़ पूंजीगत व्यय के लिए निर्धारित किए गए हैं।
क्षेत्रीय रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) को क्रियान्वित करने वाली नोडल एजेंसी एनसीआरटीसी के बजट में बीते कुछ वर्षों से लगातार कमी दर्ज की जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024–25 में निगम को ₹3,855 करोड़ का आवंटन मिला था, जिसे 2025–26 में घटाकर ₹2,918 करोड़ कर दिया गया। अब वित्त वर्ष 2026–27 के लिए यह राशि और कम होकर ₹2,200 करोड़ रह गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि परियोजना के कुछ चरणों में निर्माण कार्य अंतिम दौर में पहुंचने और पूंजीगत जरूरतों के घटने के कारण बजटीय आवंटन में यह कमी देखी जा रही है।
वर्तमान में 82 किलोमीटर लंबे दिल्ली–मेरठ नमो भारत कॉरिडोर का लगभग 55 किलोमीटर हिस्सा, जो न्यू अशोक नगर (दिल्ली) से मेरठ साउथ (उत्तर प्रदेश) तक फैला है, यात्री सेवा के लिए चालू हो चुका है। शेष 27 किलोमीटर का ट्रैक भी निर्माण के बाद पूरी तरह तैयार है, लेकिन इसके औपचारिक उद्घाटन का इंतजार किया जा रहा है। वहीं RRTS के दूसरे चरण में दिल्ली–फरीदाबाद–बल्लभगढ़–पलवल, गाजियाबाद–खुर्जा, दिल्ली–बहादुरगढ़–रोहतक और दिल्ली–शाहदरा–बरौत जैसे महत्वपूर्ण कॉरिडोर प्रस्तावित किए गए हैं।