दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रैपिड-मेट्रो) सेवा ने एनसीआर क्षेत्र में परिवहन के नए मानक स्थापित कर दिए हैं। National Capital Region Transport Corporation द्वारा संचालित इस हाईस्पीड ट्रांजिट सिस्टम को यात्रियों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। खासतौर पर मेरठ कॉरिडोर के उद्घाटन के बाद यात्रियों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है।
एक माह में करीब 10 लाख यात्रियों का इजाफा
22 फरवरी को मेरठ कॉरिडोर के शुभारंभ के बाद मार्च का महीना इस सेवा के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। फरवरी माह में जहां कुल 17,75,182 यात्रियों ने सफर किया था, वहीं मार्च में यह संख्या बढ़कर 27,18,143 तक पहुंच गई। इसका मतलब है कि केवल एक महीने में लगभग 9,42,961 अतिरिक्त यात्रियों ने रैपिड-मेट्रो को चुना। यह बढ़ोतरी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि एनसीआर में तेज, सुरक्षित और समय बचाने वाले परिवहन की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
मेरठ कॉरिडोर के जुड़ने से दिल्ली और गाजियाबाद के साथ कनेक्टिविटी पहले से कहीं अधिक सुगम हो गई है। अब यात्रियों को लंबी दूरी तय करने में कम समय लगता है, जिससे दैनिक आवागमन करने वाले लोगों के लिए यह सेवा बेहद उपयोगी साबित हो रही है। आरामदायक सफर, समय की बचत और विश्वसनीयता—ये तीनों फैक्टर इस सेवा की लोकप्रियता को तेजी से बढ़ा रहे हैं।
औसत और अधिकतम यात्रियों के आंकड़ों में भी उछाल
रैपिड-मेट्रो के उपयोग में लगातार बढ़ोतरी के चलते औसत दैनिक यात्रियों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ है:
- जनवरी 2026: 52,953 यात्री प्रतिदिन
- फरवरी 2026: 63,399 यात्री प्रतिदिन
- मार्च 2026: 87,682 यात्री प्रतिदिन
इसी तरह एक दिन में अधिकतम यात्रियों की संख्या ने भी नया रिकॉर्ड बनाया:
- जनवरी 2026: 81,550 यात्री
- फरवरी 2026: 1,02,030 यात्री
- मार्च 2026: 1,14,599 यात्री
यह आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि लोगों का भरोसा इस सेवा पर तेजी से बढ़ रहा है।
भविष्य में बनेगी मेरठ की लाइफलाइन
रैपिड-मेट्रो की बढ़ती लोकप्रियता इस ओर संकेत कर रही है कि आने वाले समय में यह मेरठ और आसपास के क्षेत्रों के लिए एक प्रमुख जीवनरेखा (लाइफलाइन) बन सकती है। तेज रफ्तार, बेहतर सुविधा और विश्वसनीय सेवा के कारण यह पारंपरिक परिवहन साधनों का मजबूत विकल्प बनकर उभर रही है। स्पष्ट है कि जैसे-जैसे नेटवर्क का विस्तार होगा, यात्रियों की संख्या में और भी वृद्धि देखने को मिलेगी—और रैपिड-मेट्रो एनसीआर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम में एक निर्णायक भूमिका निभाएगी।