मिल गया जवाब, इसीलिए अभी तक चालू नहीं हुई मेरठ मेट्रो

दिल्ली के सराय काले खां से लेकर मेरठ के मोदीपुरम तक नमो भारत रैपिड ट्रेन का ट्रायल रन 27 जून से लगातार जारी है। कई बार ट्रेन संचालन की तारीखें चर्चा में आईं, लेकिन अब सामने आया है कि भले ही ट्रायल सुचारू रूप से चल रहा है, पर कई स्टेशनों पर निर्माण कार्य अभी अधूरे हैं। यही वजह है कि मेरठ में रैपिड रेल और मेट्रो सेवाओं के नियमित संचालन में देरी हो रही है।

160 किमी/घंटा की स्पीड से चल रही है रैपिड, हर 5 मिनट में फेरे

चीफ ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) की टीम द्वारा निरीक्षण के बाद मिली कमियों को सुधारने का काम जारी है। अब ट्रायल रन के दौरान नमो भारत की गति बढ़ाकर 160 किलोमीटर प्रति घंटा कर दी गई है। साथ ही, ट्रेन की फ्रीक्वेंसी भी हर पांच मिनट पर कर दी गई है। दूसरी ओर, मेरठ मेट्रो की रफ्तार 120 किमी/घंटा तक बढ़ाते हुए इसके फेरे सात मिनट के अंतराल पर रखे गए हैं।

अधूरे स्टेशनों के कारण संचालन में लग रही देरी

पहले अनुमान लगाया जा रहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 सितंबर को मेरठ पहुंचकर मेरठ मेट्रो और रैपिड रेल के संचालन को हरी झंडी दिखाएंगे। इसको ध्यान में रखते हुए रैपिड कॉरिडोर के मेरठ साउथ स्टेशन से लेकर मेट्रो प्लाज़ा तक सड़क निर्माण और मरम्मत के कार्य तेजी से किए गए। लेकिन कार्यक्रम टलने के बाद उम्मीद थी कि दिवाली से पहले सेवाएं शुरू हो जाएंगी। फिलहाल, अधिकारियों के अनुसार, सराय काले खां, शताब्दीनगर, बेगमपुल और मोदीपुरम जैसे प्रमुख स्टेशनों पर अभी कुछ कार्य बाकी हैं। ट्रैक बिछाकर ट्रायल तो जारी है, मगर यात्री सुविधाओं को पूरा करने का काम अभी चल रहा है। इसलिए माना जा रहा है कि मेरठ में नमो भारत और मेट्रो संचालन शुरू होने में अभी थोड़ा और वक्त लगेगा।

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लेखक
Anand Kumar
आनंद कुमार, मेरठ के एक सक्रिय और समर्पित कंटेंट राइटर हैं, जो शहर और क्षेत्रीय विकास की प्रगति को लगातार लोगों तक पहुँचा रहे हैं। स्थानीय मुद्दों और परिवहन परियोजनाओं पर गहरी पकड़ रखते हुए वे आम पाठकों के लिए जानकारी को सरल और रोचक रूप में प्रस्तुत करते हैं। आनंद कुमार दो विशेष डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म — meerutmetro.in और namobharattrain.com — का संचालन करते हैं। इन वेबसाइट्स पर वे मेरठ मेट्रो और भारत की सबसे तेज़ रैपिड रेल प्रणाली नमो भारत ट्रेन से जुड़ी सभी ताज़ा ख़बरें, अपडेट्स और उपलब्धियाँ साझा करते हैं। उनका लक्ष्य है कि आम नागरिक न केवल इन परियोजनाओं की प्रगति से जुड़े रहें, बल्कि शहरी ढाँचे और सार्वजनिक परिवहन में हो रहे बदलावों की वास्तविक तस्वीर भी देख सकें। शहरी विकास, इंफ़्रास्ट्रक्चर और परिवहन जैसे गम्भीर विषयों को सरल शब्दों में प्रस्तुत कर पाठकों तक पहुँचाना ही आनंद कुमार की सबसे बड़ी पहचान है।

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