एक थप्पड़ से शुरू हुई सेंट्रल मार्केट के ध्‍वस्‍तीकरण की कहानी, मेरठ से लेकर लखनऊ तक हिल गया था प्रशासनिक तंत्र

मेरठ शहर के मध्य स्थित चर्चित सेंट्रल मार्केट कॉम्प्लेक्स संख्या 661/6 का विवाद आखिरकार अपने अंतिम पड़ाव ध्वस्तीकरण तक पहुँच गया। यह मामला सिर्फ एक अवैध निर्माण का नहीं, बल्कि एक ऐसी घटना से जुड़ा है जिसकी शुरुआत एक थप्पड़ से हुई थी। पिछले 35 वर्षों से यह कॉम्प्लेक्स कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई का केंद्र बना हुआ था।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

इस विवाद की शुरुआत 2012 में एक आरटीआई से हुई। आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने आवास विकास परिषद से सेंट्रल मार्केट की वैधता पर जानकारी मांगी। जवाब मिला — परिषद के रिकॉर्ड में सेंट्रल मार्केट नाम से कोई मार्केट मौजूद ही नहीं है। इसके बाद लोकेश खुराना ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर कर दी।

2013 का थप्पड़, जिसने बदल दी दिशा

19 अगस्त 2013 को आवास एवं विकास परिषद की टीम अधीक्षण अभियंता अरविंद कुमार के नेतृत्व में अवैध निर्माण रोकने मौके पर पहुंची। व्यापारियों ने विरोध किया और इस दौरान कॉम्प्लेक्स के हिस्सेदार एवं व्यापारी नेता विनोद अरोड़ा ने अभियंता को थप्पड़ मार दिया। यह मामला तुरंत लखनऊ तक पहुँचा और नौचंदी थाने में एफआईआर दर्ज हुई। परिषद ने ध्वस्तीकरण के लिए फोर्स मांगी, लेकिन तत्काल कार्रवाई नहीं हो पाई।

अदालतों में लंबी लड़ाई

दिसंबर 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने:

  • अवैध निर्माण पर दो महीने में कार्रवाई का आदेश दिया
  • जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए

व्यापारियों ने आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और अस्थायी राहत मिल गई। लेकिन 10 साल बाद, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए अवैध निर्माण गिराने का स्पष्ट निर्देश जारी कर दिया।

कैसे बने अवैध कॉम्प्लेक्स?

आवास विकास परिषद ने:

  • 1978 में शास्त्रीनगर गृहस्थानम योजना-3
  • 1983-84 में स्कीम नंबर-7 लॉन्च की थी — जिनमें मार्केट की सुविधा शामिल थी।
  • लेकिन इसी आड़ में कई लोगों ने: आवासीय भूखंडों पर अवैध दुकानें, शोरूम, कॉम्प्लेक्स खड़े कर दिए, जिसमें 661/6 सेंट्रल मार्केट भी शामिल था।

661/6 कॉम्प्लेक्स का अंत

लंबे कानूनी संघर्ष, आरटीआई खुलासों और कोर्ट आदेशों के बाद शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस अवैध कॉम्प्लेक्स को ध्वस्त कर दिया गया। इसके साथ ही मेरठ का यह सबसे पुराना निर्माण विवाद अपने अंत तक पहुँच गया।

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लेखक
Parag Agarwal
मैं एक फुल-टाइम प्रोफ़ेशनल ब्लॉगर और उद्यमी हूँ। पिछले 8+ वर्षों से ब्लॉगिंग और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हूँ। इस दौरान मैंने हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में 10,000+ लेख लिखे हैं और साथ ही 10 से अधिक पेजेज़ को विभिन्न विषयों पर मैनेज किया है। मेरी यात्रा का एक अहम हिस्सा क्रिकेट इंडस्ट्री रहा है, जहाँ मैंने अपने स्वयं के वेबसाइट पर 5,000+ लेख लिखे और इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्तमान में, मैं अपने समर्पित न्यूज़ और सूचना प्लेटफ़ॉर्म्स पर मेरठ मेट्रो और नमो भारत ट्रेन (भारत की सबसे तेज़ रैपिड रेल प्रणाली) से जुड़ी ख़बरें और लेख लिख रहा हूँ। मेरी ब्लॉगिंग जर्नी एक सपने की तरह शुरू हुई थी — ज्ञान साझा करने और लोगों को जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से। मैंने शुरुआत में कई गलतियाँ कीं, लेकिन धीरे-धीरे सीखा और अपने लक्ष्य तक पहुँचा। मेरा हमेशा यह मानना है कि — “You never lose, either you win or you learn.” 📩 संपर्क करें: agarwalparag89@gmail.com

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