मेरठ में चिकित्सक पर आंख के पास लगी चोट को फेवीक्विक से चिपकाने का आरोप

मेरठ में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ मंगलपांडे नगर स्थित भाग्यश्री अस्पताल के एक चिकित्सक पर आरोप लगा है कि उन्होंने दो साल के बच्चे की आंख के पास लगी चोट को टांका लगाने या सही उपचार करने के बजाय फेवीक्विक लगाकर चिपका दिया। इस गंभीर आरोप को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने दो सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है। अधिकारी का कहना है कि यदि जांच में दोष साबित होता है, तो संबंधित चिकित्सक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला जागृति विहार एक्सटेंशन के मैपल अपार्टमेंट निवासी जसप्रिंदर सिंह द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से सामने आया है। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनका दो वर्षीय बेटा मनराज सिंह खेलते समय मेज के कोने से टकरा गया था, जिससे उसकी आंख के ऊपर चोट आ गई। परिजन तुरंत उसे लेकर मंगलपांडे नगर स्थित भाग्यश्री अस्पताल पहुंचे।

जसप्रिंदर सिंह के अनुसार, अस्पताल में मौजूद चिकित्सक ने चोट की न तो ठीक से सफाई की और न ही टांका लगाने का निर्णय लिया, बल्कि कथित रूप से फेवीक्विक लगाकर घाव को चिपका दिया। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब बच्चे की मां ने आपत्ति जताई, तो डॉक्टर ने यह कहते हुए टाल दिया कि उनके बेटे को भी हाल ही में चोट लगी थी और उन्होंने उसे भी फेवीक्विक से ही ठीक किया था।

कुछ देर बाद बच्चे को तेज दर्द होने लगा। इस पर परिजनों ने फिर से डॉक्टर से शिकायत की, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। अंततः वे बच्चे को दूसरे अस्पताल लेकर गए। वहाँ डॉक्टरों ने कठिनाई से घाव में फंसे फेवीक्विक के अंश निकाले और फिर टांके लगाए।

इस पूरे मामले में CMO डॉ. अशोक कटारिया ने बताया कि दो सदस्यीय टीम को जांच का जिम्मा सौंपा गया है और अस्पताल से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। आरोप सही पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

अस्पताल का बयान

“चोट पर लगाया गया नियोस्पोरिन पाउडर, फेवीक्विक के आरोप बेबुनियाद” – भाग्यश्री अस्पताल प्रबंधन

भाग्यश्री अस्पताल के प्रबंधक डॉ. पंकज त्यागी ने मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तीन दिन पहले देर रात करीब 9 बजे दो वर्ष का बच्चा अपने पिता के साथ आंख की मामूली चोट के इलाज के लिए अस्पताल आया था। उन्होंने बताया कि बच्चे की चोट बहुत ही हल्की थी और उसके पिता ने टांके लगवाने से इनकार कर दिया था।

डॉ. पंकज त्यागी के अनुसार, अस्पताल के स्टाफ ने केवल घाव के ऊपर नियोस्पोरिन पाउडर लगाया था और इसके बाद परिजन बच्चे को लेकर घर चले गए। उन्होंने कहा कि स्टाफ पर फेवीक्विक का इस्तेमाल करने का आरोप पूरी तरह से निराधार और गलत है।

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लेखक
Parag Agarwal
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