दिल्ली और मेरठ के बीच यात्रा अब और अधिक आरामदायक और आसान होने जा रही है। मेरठ साउथ से मोदीपुरम तक का मेट्रो ट्रैक पूरी तरह तैयार हो चुका है। इस कॉरिडोर में कुल 13 मेट्रो स्टेशन बनाए गए हैं। एनसीआरटीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर शलभ गोयल के अनुसार तय समय पर यह प्रोजेक्ट पूरा कर लिया गया है, जिससे यात्रियों को सुविधा और बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
मेरठ मेट्रो लाइन की लंबाई 23.60 किलोमीटर है, जिसमें मेरठ साउथ से लेकर मोदीपुरम तक कुल 13 स्टेशन हैं। इनमें 9 एलिवेटेड, 3 भूमिगत और एक ग्रेड स्टेशन (मोदीपुरम डिपो) शामिल है। खास बात यह है कि इसी ट्रैक पर नमो भारत (RRTS) भी चलेगी, यानी देश में पहली बार एक ही ट्रैक पर सेमी हाईस्पीड ट्रेन और मेट्रो दोनों का परिचालन होगा।
मेरठ मेट्रो की विशेषताएँ, क्या है इसमें खास – Meerut Metro Special Feature
मेरठ मेट्रो का ट्रैक जमीन पर, एलिवेटेड और टनल – तीनों हिस्सों से होकर गुजरता है। तीन कोचों वाली इस मेट्रो की बॉडी एयरोडायनामिक है, जिससे सफर स्मूद और आरामदायक होगा। सुरक्षा और तकनीक के मामले में भी इसे अत्याधुनिक बनाया गया है। ट्रेनों को नियंत्रित करने के लिए ETCS लेवल-2 के साथ एलटीई आधारित हाइब्रिड लेवल-3 सिग्नलिंग सिस्टम लगाया गया है, जो ट्रेन को न केवल सुरक्षित बल्कि ऊर्जा-कुशल भी बनाता है।
- अत्याधुनिक बॉडी डिजाइन, 3.2 मीटर चौड़े और 22 मीटर लंबे स्टेनलेस स्टील कोच
- तीन कोच वाली मेट्रो, लगभग 175 सीटों की क्षमता और 700 से अधिक यात्री एक बार में सफर कर सकेंगे
- एर्गोनॉमिक डिजाइन, 2×2 स्टाइल की आरामदायक सीटें और सामान रखने के लिए लगेज रैक
- खड़े होने वाले यात्रियों के लिए ग्रैब हैंडल और आधुनिक इंटीरियर
- पूरी तरह मेक-इन-इंडिया तकनीक – 100% डिजाइन और निर्माण भारत में
- ऊर्जा-कुशल प्रणाली, ऑटोमैटिक ट्रेन कंट्रोल और रिजेनेरेटिव ब्रेकिंग
- चार्जिंग पोर्ट, पुश-बटन दरवाजे और इंडिकेशन लाइट
- बड़े डिस्प्ले बोर्ड, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम और सीसीटीवी कैमरे
- इमरजेंसी अलार्म, टॉक-बैक सिस्टम और आपातकालीन निकासी उपकरण
- भीड़ प्रबंधन के लिए सभी स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर (PSD)
- मेडिकल स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की सुविधा
- यूरोपीय ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ETCS) लेवल-2 और एलटीई आधारित सिग्नलिंग
दिल्ली मेट्रो से कितना अलग?
- दिल्ली मेट्रो में स्टील की सीटें हैं, जबकि मेरठ मेट्रो में कुशन वाली आरामदायक सीटें होंगी।
- दिल्ली मेट्रो में लगेज बॉक्स की सुविधा नहीं है, जबकि मेरठ मेट्रो में सामान रखने के लिए विशेष रैक दिए गए हैं।
- दिल्ली मेट्रो की परिचालन गति 80 किमी/घंटा है, जबकि मेरठ मेट्रो 120 किमी/घंटा की स्पीड से चलेगी और इसकी डिजाइन स्पीड 135 किमी/घंटा है।
- दिल्ली मेट्रो केवल मेट्रो ट्रेन है, लेकिन मेरठ में एक ही ट्रैक पर सेमी हाईस्पीड नमो भारत और मेट्रो दोनों का संचालन होगा।
दिल्ली से मेरठ आने वाले यात्रियों के लिए भी बड़ी राहत की खबर है। इस महीने के अंत तक सराय काले खां से लेकर मेरठ तक नमो भारत (RRTS) का पूरा संचालन शुरू होने की संभावना है। फिलहाल 82 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में लगभग 55 किलोमीटर पर परिचालन हो रहा है। सराय काले खां और आनंद विहार पर रेलवे, बस और मेट्रो के इंटीग्रेशन का काम लगभग पूरा हो चुका है। आने वाले समय में ये स्टेशन दिल्ली–मेरठ, दिल्ली–करनाल और दिल्ली–गुरुग्राम (SNB) रूट्स के लिए भी बड़े हब के रूप में विकसित होंगे।